“वीरगंज में डोजर आतंक बंद करऽ, हमनी के विकास आ विस्तार चाहत बानी, वैकल्पिक उपाय खोजल जाव, विकास के नाम पर विनाश मत करऽ” एह नारा संगे वीरगंज बचाव संघर्ष समिति सरकार से शहर के ऐतिहासिक अस्तित्व बचावे के अपील कइले बा।
बियफे के दिन नेपाल पत्रकार महासंघ पर्सा शाखा में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में पीड़ित पक्ष वीरगंज के पुरान बस्ती आ सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण करे के मांग कइलस। करीब दू सौ बरिस पुरान ऐतिहासिक, धार्मिक आ आर्थिक महत्व वाला वीरगंज शहर के मौलिक पहचान बचावे खातिर स्थानीय बासिन्दा, उद्योगी–व्यवसायी आ सरोकारवाला लोग एकजुट भइल बा।
पत्रकार सम्मेलन में वीरगंज के पूर्व मेयर विजय सरावगी, वीरगंज वडा नम्बर १ के वडा अध्यक्ष मनोज कुर्मी, वडा नम्बर ९ के वडा अध्यक्ष जहावर गुप्ता, नेपाली कांग्रेस के नेता अरविन्द गुप्ता, समाजसेवी सुरेन्द्र तिवारी लगायत वक्ता लोग कहलस कि अभी हो रहल मुख्य सड़क विस्तार से ऐतिहासिक बस्ती के अस्तित्व पर खतरा बढ़ गइल बा। गण्डक से घंटाघर आ रजत जयन्ती चौक तक के इलाका में करीब १५ सय घर प्रभावित हो सकेला आ लगभग ९० हजार लोग के रोजगार पर असर पड़े के संभावना बा।
ओह लोग के कहना रहल कि अगर सड़क विस्तार के नाम पर घर तोड़ल गइल त कई परिवार बेघर हो जइहें, व्यापार–व्यवसाय चौपट हो जाई आ आर्थिक संकट खड़ा हो जाई। राज्य से मिलल लालपुर्जा के आधार पर बनावल घर पर डोजर चला के संरचना हटावल नागरिक अधिकार पर सीधा हस्तक्षेप हवे।
वक्ता लोग याद दिलवलस कि २०७८ चैत १३ गते वीरगंज उपमहानगरपालिका, वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ, विभिन्न राजनीतिक दल आ बुद्धिजीवी लोग के मौजूदगी में नेपाल–भारत सीमा मितेरी पुल से गण्डक तक के क्षेत्र के घना आबादी क्षेत्र घोषित करके ओहिजा के घर–टहरा आ संरचना ना तोड़े के निर्णय भइल रहल। एह निर्णय के कार्यान्वयन खातिर सम्बन्धित निकाय में सिफारिसो कइल गइल रहल।
एहसे पहिले भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात मंत्रालय त्रिभुवन राजपथ अंतर्गत वीरगंज बजार क्षेत्र के सड़क ‘अलाइनमेन्ट’ बदले के प्रस्ताव मंत्रिपरिषद में पेश कइले रहल। २०७२ भदौ २१ गते के मंत्रिपरिषद बैठक में पुरान मार्ग बदल के पथनैया–परवानीपुर होते बहुअरी स्थित एकीकृत जाँचचौकी (आईसीपी) तक नया मार्ग बनावे के निर्णय भइल रहल।
स्थानीय लोग के अनुसार एह निर्णय के बाद नया मार्ग बन के संचालन में आ चुकल बा। एकरा अलावा ११० फिट चौड़ सड़क वाला बाइपास, ४० फिट के दोसरा बाइपास आ रेलवे क्षेत्र के उपयोग करके ६६ फिट चौड़ सड़क भी संचालन में बा।
पत्रकार सम्मेलन में सहभागी स्थानीय बासिन्दा लोग सार्वजनिक सड़क ऐन, २०३१ के दफा ३ अनुसार पुरान बस्ती आ भौगोलिक स्थिति के ध्यान में रखत सड़क के मापदण्ड घटावे के व्यवस्था लागू करे के मांग कइलस। ओह लोग के कहना बा कि नारायणगढ–मुग्लिन सड़क खण्ड में लागू ‘शहरी मार्ग’ मापदण्ड जइसन वीरगंज में भी दायाँ–बायाँ ९/९ मीटर के मापदण्ड लागू होखे के चाहीं।
स्थानीय लोग सरकार से वीरगंज के मठ–मन्दिर, मस्जिद, धर्मशाला, विद्यालय आ अस्पताल जइसन ऐतिहासिक आ सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण करे के मांग कइले बा। साथे ही, काठमाण्डू के असन क्षेत्र जइसन पुरान बस्ती संरक्षण नीति वीरगंज में भी लागू करे के मांग उठावल गइल बा। ओह लोग मीडिया से भी अपील कइलस कि ई मांग सरकार तक प्रभावी तरीका से पहुँचावे में सहयोग कइल जाव।

