काठमांडू । श्रम संस्कृति पार्टी के सांसद आरेन राई चेतावनी दिहलें कि संविधान संशोधन के नाम पर प्रदेश खारिज करे या संघीयता, लोकतंत्र आ धर्मनिरपेक्षता में छेड़छाड़ करे के कवनो कोशिश स्वीकार ना कइल जाई।
प्रतिनिधि सभा के बैठक में बोलत सांसद राई कहलें कि संविधान संशोधन के फोकस अधिकार के विस्तार आ समावेशिता के मजबूती पर होखे के चाहीं।
उहाँ कहलें, “अगर संविधान संशोधन करे के बा, त महिला के अधिकार एक तिहाई से बढ़ा के ५० प्रतिशत कइल जाव। आदिवासी जनजाति, दलित, मधेसी, मुस्लिम, थारू, उत्पीड़ित आ पिछड़ल समुदाय, विद्यार्थी, मजदूर आ किसान सभ के अधिकार सुनिश्चित होखे के चाहीं, एह हिसाब से संविधान के पुनरावलोकन कइल जाव।”
राई कहले कि २०७२ साल के संविधान कुछ समुदायन के अधिकार पूरा तरह से सुनिश्चित ना कर पावल बा, एह से ओह अधिकारन पर फेर से विचार करे के जरूरत बा।
उहाँ चेतावनी दिहलें कि संविधान संशोधन के नाम पर लोकतांत्रिक संरचना में हस्तक्षेप भइल, त देश में अस्थिरता पैदा हो सकेला। सिंहदरबार में बैठ के शासन करे के प्रवृत्ति के खिलाफ फेर से जनआंदोलन उठ सकेला, उहाँ इहो बतवलें।
सांसद राई सरकार आ राजनीतिक नेतृत्व से जिम्मेदारी से बयान देवे के अपील करत, प्रधानमंत्री के हाल के बयान सुधार करे के मांग दोहरवले बाड़े।

