कञ्चनपुर के पत्रकार खेम भण्डारी जेल से रिहा हो गइल बाड़ें। गाली–बेइज्जती मामला में सजा पवला के बाद ऊ एक महीना सात दिन कैद काट के शनिचर के दिन रिहा भइल बाड़ें।
निर्मला पन्त हत्या कांड से जुड़ल खबर छापला के कारण भण्डारी पर कञ्चनपुर जिला अदालत में गाली–बेइज्जती के मामला दर्ज भइल रहे। अदालत 2082 जेठ 1 गते उहाँ के दोषी ठहरावत कैद के सजा सुनवले रहे। एह फैसला के सुनवाई तत्कालीन जज राजेन्द्र सिंह भण्डारी के इजलास में भइल रहे।
जिला प्रहरी कार्यालय कञ्चनपुर के पूर्व एसपी दिल्लीराज विष्ट के बेटा किरण विष्ट, आपन नाम खबर में जोड़ल गइल कहत पत्रकार भण्डारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवले रहस।
अदालत के फैसला लागू करत पुलिस 18 असार के दिन भीमदत्त नगरपालिका–18 कटान से भण्डारी के गिरफ्तार कइले रहे। भण्डारी के कहनाम बा कि खबर के खण्डन छपवावे आ प्रेस काउन्सिल में शिकायत करे के व्यवस्था होतहुँ, बिना जरुरत उनकर गिरफ्तारी कइल गइल।
भीमदत्त नगरपालिका–2 उल्टाखाम के 13 बरिस के निर्मला पन्त के 2075 साउन 11 गते बलात्कार के बाद हत्या कइल हालत में शव मिलल रहे। ऊ एक दिन पहिले किताब पढ़े खातिर साथी के घर गइल रहली आ उनका शव निम्बुखेड़ा खोलाके किनारे उखुबारी में मिलल रहे।
घटना स्थल से सबूत नष्ट करे के आरोप लगावत स्थानीय लोग आंदोलन कइले रहे। पत्रकार भण्डारी के कहना बा कि ऊ स्थानीय लोग के मांग आ घटना से जुड़ल सवाल पर खबर छापत रहलें। ऊ मानसखण्ड दैनिक के प्रकाशक आ सम्पादक भी बाड़ें।
निर्मला पन्त के शव मिलला के बाद पुलिस पर सबूत सुरक्षित ना राखे के आरोप लगल रहे। कपड़ा जइसन सुरुवाल के पानी से धो के सबूत मिटावे, घटनास्थल सुरक्षित ना करे आ डीएनए जइसन महत्वपूर्ण प्रमाण नष्ट होखे के आरोप लगल रहे।
गृह मन्त्रालय के जांच रिपोर्ट में भी कई कमी देखावल गइल, जइसे संदिग्ध लोग के पैरों के निशान आ किताब–कॉपी पर रहे अंगूठा छाप के सही ढंग से संकलन ना कइल गइल।
अबले निर्मला पन्त हत्या मामला में असली दोषी के पहचान ना हो सकल बा। पुलिस बतावत बा कि मामला के जांच अभी भी जारी बा।

