वीरगञ्ज । जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव ‘मधेस राज्य’ बनावे खातिर फेरु एक बेर आन्दोलन करे के मधेसी जनता से तइयार रहे के आह्वान कइले बाड़न।
शनिचर के वीरगञ्ज में आयोजित नौ दलीय अग्रगामी मोर्चा के मधेस प्रदेशस्तरीय कार्यकर्ता भेला आ अभिमुखीकरण कार्यक्रम के संबोधन करत यादव कहलन कि वर्तमान मधेस प्रदेश में मधेसी समुदाय के शासन आ प्रशासन में पर्याप्त पहुँच स्थापित नइखे हो पावल, एह से फेरु आन्दोलन के जरूरत बा।
यादव कहलन कि अभी के आठ जिला में सीमित मधेस प्रदेश ओह लोग के चाहल प्रदेश नइखे।
उहाँ कहलन, “अभी जइसन मधेस प्रदेश हमनी ना खोजले रहनी। मधेस प्रदेश भइला के बावजूद एह प्रदेश के शासन आ प्रशासन दुनू मधेस से बाहर के लोगन के कब्जा में बा। हमनी अइसन प्रदेश चाहत रहनी जहाँ शासन आ प्रशासन में मधेसी लोग के भूमिका होखे। प्रदेश के पुलिस, न्यायालय आ कर्मचारी सभ मधेस में जनमल मधेसी होखे।”
यादव के तर्क रहे कि संघीयता के असली मतलब प्रदेश में अपना शासन आ प्रशासन होखल आ केन्द्र में हिस्सेदारी सुनिश्चित होखल ह। एह खातिर मधेसी जनता के फेरु संघर्ष करे के समय आ गइल बा।
उहाँ कहलन, “मधेसी लोग अपना शासन आ प्रशासन खातिर अब फेरु एक बेर लड़े के समय आ गइल बा। एह खातिर सभे तइयार रहऽ। अधिकार केहू थारी में सजा के ना देला, अधिकार लड़ के लेवे के पड़ेला।”
यादव देश के वर्तमान संकट आ दुर्दशा खातिर नेपाली कांग्रेस आ कम्युनिस्ट पार्टी सभ के जिम्मेदार ठहरावत आरोप लगवलन। उनका कहलन कि अतीत में कांग्रेस आ कम्युनिस्ट सभ मिलके सत्ता चलवलें आ देश के लूटलें।
उहाँ आरोप लगवलन कि कांग्रेस आ कम्युनिस्ट सभ मधेसी समुदाय के समान नागरिक के रूप में व्यवहार ना कइलें आ संघीयता के संस्थागत करे के इच्छा नइखे देखवले।
यादव के दावा रहे कि मधेस आन्दोलन के कारण कांग्रेस आ एमाले संघीय गणतन्त्र स्वीकार करे खातिर मजबूर भइलें। उनका मुताबिक, मधेस आन्दोलन ना भइल रहित त कांग्रेस आ कम्युनिस्ट सभ संघीय गणतन्त्र स्वीकार करे के स्थिति में ना आवतें।
यादव ईहो दावा कइलन कि कांग्रेस के कुछ नेता अभी हिन्दू राष्ट्र आ संवैधानिक राजतन्त्र के पक्ष में अभियान चला रहल बाड़ें। उहाँ ईहो टिप्पणी कइलन कि नेपाल में अपने के असली कम्युनिस्ट कहे वाला राजनीतिक शक्ति अब नइखे।
राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के निशाना बनावत यादव संघीयता के विषय में पार्टी आ ओकर नेता सभ के दोहर नीति होखे के आरोप लगवलन।
उहाँ कहलन कि “घण्टी छाप के नेता मधेस के वोट लेवे खातिर जनकपुर में संघीयता मजबूत करे के बात करेलें। बाकिर उहे नेता चितवन पहुँच के प्रदेश खारेज करे के बात करेलें। एहसे संघीयता के विषय में घण्टी पार्टी आ ओकर नेता सभ के दोहर नीति आ चरित्र बा।”
‘बालेन सरकार लाचार हो गइल’
कार्यक्रम में आम जनता पार्टी (आजपा) के अध्यक्ष आ पूर्वमन्त्री प्रभु साह प्रधानमन्त्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाला सरकार के कमजोर आ लाचार बतवलन।
साह के दावा रहे कि सरकार विपक्ष के कारण ना, बल्कि रास्वपा के भीतर से मिल रहल असहयोग के कारण कमजोर देखात बा। उहाँ सुनसरी के देवानगञ्ज में भइल धार्मिक तनाव से लेके रसुवा के भोटेकोशी बाढ़ से पैदा भइल विपत्ति तक के घटना में रास्वपा नेतृत्व प्रधानमन्त्री के बाइपास करके गतिविधि कइले के आरोप लगवलन।
विदेश सम्बन्ध आ कूटनीतिक अभ्यास के विषय में भी साह के दावा रहे कि रास्वपा सभापति रवि लामिछाने आ प्रधानमन्त्री शाह अलग-अलग दिशा में खड़ा बाड़ें।
लामिछाने समानान्तर सरकार चलावे के कोशिश करत बाड़न, जेकरा से सरकार के कामकाज पर असर पड़ रहल बा आ जागरूक नागरिक सभ से शिकायत आवे लागल बा, साह कहलन।
कार्यक्रम के जनमत पार्टी के अध्यक्ष डा. सीके राउत, प्रगतिशील लोकतान्त्रिक मोर्चा के नेता जनार्दन शर्मा लगायत अन्य नेतनियो संबोधन कइलें।
नौ दलीय अग्रगामी मोर्चा के मुताबिक, मधेस में संगठन विस्तार, कार्यकर्ता परिचालन आ अपना राजनीतिक एजेन्डा के स्थानीय तह तक पहुँचावे के उद्देश्य से प्रदेशस्तरीय कार्यक्रम कइल जा रहल बा।

