नेपाल नागरिकता (चौथा संशोधन) नियमावली, २०८२ लागू होखला के बाद देशभर में कुल २,९४८ लोग के आपन माई के नाम से नागरिकता मिलल बा। गृह मन्त्रालय के अनुसार नया नियम लागू होखला के बाद ई लोग नया व्यवस्था अनुसार नागरिकता हासिल कइलस।
चौथा संशोधन के बाद नागरिकता नियमावली, २०६३ के नियम ३, ५, ७, ८ आ १४ में बदलाव कइल गइल बा। साथे ही नियम १६ (क) जोड़ल गइल बा आ मूल नियमावली के अनुसूची में भी बदलाव भइल बा।
नया नियम अनुसार, अगर बाप या माई में से कोई एक जन्म के आधार पर नेपाली नागरिक बा आ दोसरा अभिभावक के नागरिकता मिले से पहिले मृत्यु हो गइल होखे या बाप के ठेगाना अज्ञात होखे, त अइसन हालत में नेपाली माई से विदेश में जनमल संतान के नागरिकता मिले सकेला। एह मामला में प्रमुख जिल्ला अधिकारी जांच करके अङ्गीकृत नेपाली नागरिकता दे सकेला।
नागरिकता देवे के समय नियम में बतावल कागज के अलावा खुद के घोषणा (स्वघोषणा) के भी महत्वपूर्ण आधार मानल जा सकेला। एहसे स्थानीय तह के भूमिका आ जिम्मेदारी अउरी मजबूत भइल बा।
संशोधन में नाबालिग परिचयपत्र वितरण के बात के भी साफ कइल गइल बा। साथे ही, विदेशी औरत अगर नेपाली पुरुष से बियाह करेले, त वैवाहिक अङ्गीकृत नागरिकता मिलला से पहिले ओकर नेपाल में बसोबास अनुमति (भिसा) नियमित होखे के जरूरी बा।
गृह मन्त्रालय के कहना बा कि नया कानूनी व्यवस्था से माई के नाम से नागरिकता देवे के प्रक्रिया आसान, पारदर्शी आ स्थानीय स्तर पर सुलभ बनावे के लक्ष्य राखल गइल बा।

