काठमांडू। भादो २३ आ २४ के भइल जेनजी आंदोलन के बारे में तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक कहले बाड़न कि जेनजी अगुवन के अभिव्यक्ति से प्रदर्शन में घुसपैठ भइल, ई तथ्य उहे प्रत्यक्ष देखले बाड़न।
गौरीबहादुर कार्की के नेतृत्व वाला आयोग द्वारा तयार कइल प्रतिवेदन सरकार अबहीं तक सार्वजनिक नइखे कइले। लेकिन ‘जनआस्था’ साप्ताहिक के ऑनलाइन संस्करण में प्रतिवेदन के विषयवस्तु सार्वजनिक भइल बा। प्रतिवेदन के फोटोकॉपी के अनुसार, लेखक आयोग के दिहल बयान में बतवले बाड़न कि घटना सुरु होखे से पहिले ही सामाजिक सञ्जाल आ अन्य माध्यम से असंतोष आ आक्रोश बढ़त रहे, जेकर जानकारी सुरक्षा निकाय से मिलल रहे।
लेखक कहले बाड़न, “भादो २३ के जेनजी पीढ़ी जे मांग उठवलस, ऊ मूल रूप से सही रहे, लेकिन ओकर पवित्र भावना में घुसपैठ भइल आ राज्य के ऐतिहासिक आ अमूल्य संरचना पर हमला भइल, ई केवल आवेग के परिणाम कह के सीमित नइखे कइल जा सके।”
उ कहले कि जेनजी अगुवन प्रदर्शन के हिंसात्मक बनावे के कोशिश कइले आ अपन साथी लोग के “आ–आपन घर लौट जाईं” कह के चेतावनी दिहले, जे घुसपैठ के तथ्य के पुष्टि करेला।
लेखक फिल्ड में प्रत्यक्ष आदेश त नइखन दिहले, बाकिर नीतिगत निर्देशन, समन्वय आ राजनीतिक स्तर से जरूरी सहजीकरण करे के जिम्मेवारी निभवले बाड़न।
ई बयान जेनजी आंदोलन के दौरान भइल हिंसात्मक घटनाप्रति सरकार के भूमिका, सुरक्षा निकाय के तैयारी आ घुसपैठ के स्पष्ट तस्वीर पेश करेला।

