सरकार द्वारा निजी क्षेत्र के सञ्चारमाध्यम सभ के सरकारी विज्ञापन ना देवे के फैसला के खिलाफ सर्वोच्च अदालत में रिट निवेदन दायर कइल गइल बा।
नेपाल मिडिया सोसाइटी के ओर से अधिवक्ता अनन्तराज लुइँटेल ई रिट दाखिल कइले बाड़न। उनकर कहना बा कि प्रधानमंत्री आ मन्त्रिपरिषद् कार्यालय के ई निर्णय प्रेस के स्वतंत्रता आ सञ्चार क्षेत्र के अस्तित्व पर सीधा प्रहार बा। एह रिट पर आज मंगर के दिने सर्वोच्च में प्रारम्भिक सुनवाई होखे जा रहल बा।
पिछला चैत १८ गते, प्रधानमंत्री कार्यालय के सचिव स्तर के फैसला से ई निर्देश जारी भइल रहे कि सभ सरकारी विज्ञापन खाली सरकारी सञ्चारमाध्यम में ही प्रकाशित कइल जाव। एह फैसला के तहत संघीय मन्त्रालय, मातहत निकाय, प्रदेश आ स्थानीय तह सभ के निजी सञ्चारमाध्यम में विज्ञापन ना देवे के सर्कुलर भी जारी कइल गइल रहे।
रिट में ई दलील दिहल गइल बा कि सरकार के ई कदम विज्ञापन ऐन २०७६ के भावना के खिलाफ बा आ एह से संविधान से मिलल अभिव्यक्ति के आजादी आ सञ्चार के अधिकार कमजोर हो जाई।
मिडिया सोसाइटी, जवन दैनिक पत्र-पत्रिका के प्रकाशक सभ के संस्था ह, ऊ कहले बा कि ई निर्णय से सञ्चार क्षेत्र के भारी नुकसान हो सकेला। एह से अदालत से मांग कइल गइल बा कि अंतरिम आदेश जारी क के एह निर्णय के तत्काल लागू होखे से रोकल जाव।
रिट में ई भी उल्लेख बा कि सरकारी विज्ञापन पर एकाधिकार कायम करे के कोशिश लोकतांत्रिक मूल्य-मान्यता आ व्यावसायिक सञ्चारमाध्यम के जिए के अधिकार पर चोट बा। आज के सुनवाई से ई तय हो सकेला कि ई विवादित सर्कुलर लागू रही कि ना।

