अर्थ मंत्रालय सरकारी कर्मचारी आ पदाधिकारी लोग के मिलल इंधन सुविधा घटा दिहलस। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले कहलन कि इंधन संकट से अर्थतंत्र के बचावे खातिर एह फैसला लिहल गइल बा।
अंतरराष्ट्रीय बजार में पेट्रोलियम पदार्थ के दाम बढ़ला, आपूर्ति में कमी आ चालू आर्थिक साल में तय राजस्व संकलन ना होखला के कारण सार्वजनिक खर्च में बचत करे खातिर मंत्रालय एह फैसला के पुष्टि कइले बा।
आर्थिक कार्यविधि आ वित्तीय उत्तरदायित्व ऐन, २०७६ के दफा २० आ २४ के अधिकार इस्तेमाल करत मंत्रालय ‘कार्य संचालन निर्देशिका, २०८१’ के बिंदु ४९ में इंधन संबंधी प्रावधान में बदलाव कइले बा। डॉ. स्वर्णिम वाग्ले २३ चैत के एह संशोधन के स्वीकृति दिहले।
संशोधन के मुताबिक:
१२५ लिटर इंधन मिलत सचिव आ विशिष्ट श्रेणी पदाधिकारी अब ७० लिटर पइहें।
१०० लिटर पावत सहसचिव स्तर के पदाधिकारी अब ५० लिटर पइहें।
मंत्री आ संवैधानिक पदाधिकारी लोग कानून अनुसार इंधन सुविधा पाई।
केंद्रिय स्तर के कार्यालय खातिर सवारी साधन के इंधन सुविधा भी कटौती भइल बा।
३० कर्मचारी वाला कार्यालय: पहिले ७५ लिटर पेट्रोल आ १०० लिटर डिजल पावत रहे, अब ३५ लिटर पेट्रोल आ ५० लिटर डिजल।
५० कर्मचारी वाला कार्यालय: पहिले ७५ लिटर पेट्रोल आ १०० लिटर डिजल, अब ३५ लिटर पेट्रोल आ ५० लिटर डिजल।
ओकरा ऊपर हर १०० कर्मचारी खातिर ३५ लिटर पेट्रोल आ ५० लिटर डिजल मिली।
दू-चाकवा सवारी खातिर पहिले प्रति महीना १२ लिटर पेट्रोल मिलत रहे, अब मात्र ८ लिटर दीहल जाई।

