पर्सा के पटेर्वा सुगौली गाउँपालिका वडा नम्बर १ में स्थित पर्सा राष्ट्रीय निकुञ्ज के भीतर पड़ेला प्रसिद्ध धार्मिक आ ऐतिहासिक स्थल दुधेश्वरनाथ महादेव मंदिर (रामभौरी भाठा धाम) में नया साल 2083 के शुरुआत के साथे भव्य तीन दिन के मेला शुरू हो गइल बा। मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार, ई मेला वैशाख 1 से 3 गते तक चली, जहाँ नेपाल आ भारत के अलग-अलग जिला से हजारों श्रद्धालु लोग के आवागमन जारी बा।
भाठा धाम में साल में तीन बेर—वैशाख त्रयोदशी, माघ के श्रीपंचमी आ सावन महीना भर—विशेष मेला लागेला। आपन मनोकामना पूरा भइला पर श्रद्धालु लोग मंदिर परिसर के करीब 20 जगह पर अष्टजाम आ भजन-कीर्तन करत बा, जवन से पूरा इलाका भक्तिमय बन गइल बा।
रंगपुर टाँडी बाजार से करीब 14 किलोमीटर जंगल रास्ता आ कच्चा सड़क पार कइला के बाद ई मंदिर पहुँचल जा सकेला। राष्ट्रीय निकुञ्ज के भीतर होखे के कारण रास्ता में हरिण, बनसूअर, मयूर, हाथी, बंदर, नीलगाय, बाघ आ भालू जइसन जंगली जनावरन के भी देखे के मौका मिलेला, जवन यात्रा के अउरी रोचक बना देला।
मंदिर के इतिहास आ विकास
करीब 100 साल पुरान इतिहास वाला ई मंदिर पहिले एगो छोट खर के झोपड़ी से शुरू भइल रहे। ढुंग (पत्थर) के दुधेश्वरनाथ महादेव मान के पूजा कइल जात रहे, आ कुछ चमत्कारिक घटना के बाद ई स्थान के धार्मिक महत्व बढ़ गइल।
आज भाठा धाम के संरचना में काफी सुधार भइल बा। गौत्री भलुवाई नदी में स्नान कइला के बाद करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल आ 300 से अधिक सीढ़ी चढ़ के पहाड़ के चोटी पर मंदिर पहुँचल जाला। अब उहाँ शिव आ माता पार्वती के भव्य पक्का मंदिर बन चुकल बा। श्रद्धालु लोग खातिर धर्मशाला, अस्थायी शौचालय आ पाइप से पानी के भी व्यवस्था कइल गइल बा।
नेपाली सेना के अनुसार, मेला के पहिला दिने करीब 800 मोटरसाइकिल, 80 ट्रैक्टर, 100 टैक्सी/ऑटो आ 100 से अधिक चारपहिया गाड़ी मंदिर क्षेत्र में पहुँचल, आ कुल मिला के करीब 10 हजार लोग दर्शन करे पहुँचल बा।
भारत के रक्सौल, मैनाटार, बेतिया, अरेराज आ नेपाल के पर्सा, बारा, रौतहट, सर्लाही, महोत्तरी आ चितवन से भारी संख्या में श्रद्धालु लोग आ रहल बा।
मेला समिति सदस्य शम्भु यादव कहले कि श्रद्धालु लोग के सुविधा खातिर हरसंभव प्रयास कइल जा रहल बा। हजारों लोग के भीड़ के प्रबंधन चुनौतीपूर्ण जरूर बा, लेकिन धार्मिक आस्था से सब लोग उत्साहित बा।
वहीं, स्थानीय पत्रकार चिरञ्जीवी यादव के कहना बा कि साल में खाली तीन बेर मेला लगला से पूरा विकास ना हो पाई। अगर साल भर मेला के वातावरण बन जाए, त रोजगार के अवसर बढ़ी आ धार्मिक पर्यटन में काफी सुधार हो सकेला।

