राष्ट्रीय सभा के अंतर्गत विकास, आर्थिक मामला आ सुशासन समिति सीमा इलाका में रहत आम जनता के भन्सार के नाम पर होखे वाला झंझट आ सास्ती तुरन्त रोके खातिर सरकार के कड़ा निर्देश देले बा।
भारत से आवे वाला कम दाम के घर-गृहस्थी के सामान पर भी कड़ाई कइला से लोगन के रोजमर्रा जिनगी कठिन हो गइल बा, एह निष्कर्ष पर पहुंच के समिति ई कदम उठवले बा।
सौ रुपइया के सामान परो कड़ाई पर आपत्ति
बुध के भइल बैठक में भारत से लावल १०० रुपइया से अधिक कीमत के सामान पर भी भन्सार नियम लागू कइला के मुद्दा पर गंभीर चर्चा भइल। समिति के सभापति कृष्णप्रसाद पौडेल कहले कि सीमा इलाका के लोगन के आर्थिक हालत आ रोज के जरूरत के नजरअंदाज करत सरकार अव्यवहारिक नीति अपनवले बा।
समिति के मानना बा कि सीमावर्ती इलाका के लोग अपन रोजी-रोटी खातिर नजदीकी बाजार से सस्ता सामान ले आवेले, लेकिन सरकार के ई कदम जनविरोधी लागत बा।
बैठक में सभापति पौडेल कहले कि जनप्रतिनिधि के मुख्य जिम्मेदारी जनता के सहूलियत देखल होला। “सीमा इलाका के लोग थोड़ा सस्ता सामान ला के गुजारा करेले, ओहपर भी भन्सार लगा के बाधा खड़ा कइल सही नइखे,” ऊ कहले। उनकर कहना रहल कि राजस्व जुटावे के नाम पर निम्न आ मध्यम वर्ग के जीवनयापन पर असर पड़त बा।
अव्यवहारिक फैसला वापस लेवे के निर्देश
समिति के सदस्य लोग कहले कि सीमा इलाका में पुलिस आ भन्सार प्रशासन के कड़ाई से जनता में असंतोष बढ़त बा। एह आधार पर समिति सरकार से कहले बा कि ई अव्यवहारिक फैसला तुरन्त वापस लेवे आ सीमा नाका पर अनावश्यक जांच-पड़ताल आ सास्ती बंद कइल जाव।
साथे ही, समिति ई सुझाव भी देले बा कि सरकार राजस्व चुहावट रोके खातिर बड़ा तस्करी पर ध्यान दे, लेकिन आम जनता के घर-गृहस्थी के जरूरत में लचीलापन अपनावो।

