वीरगंज । मधेस प्रदेश के इकलौता महानगर वीरगंज अभी संघीय सरकार आ स्थानीय सरकार के आपसी खींचतान आ सरकारी निकाय के गैरजिम्मेदारी के चलते लगभग ठप हालत में पहुंच गइल बा।
पिछला दुई महीना से प्रमुख प्रशासनिक अधिकरी ना होखे के कारण महानगर के पूरा प्रशासनिक व्यवस्था ध्वस्त हो गइल बा। आर्थिक अधिकार ना होखे से महानगर के कामकाज भी लगभग रुक गइल बा। सुशासन के नारा देके सत्ता में आइल सरकार मधेस के एह मुख्य व्यापारिक केंद्र के संकट के पूरी तरह नजरअंदाज करत नजर आवत बा।
संघीय मामिला आ सामान्य प्रशासन मंत्रालय से भेजल गइल सहसचिव रेशमलाल कंडेल के मेयर राजेशमान सिंह द्वारा हाजिर ना करे देवे के फैसला से शुरू भइल विवाद अब गंभीर रूप ले चुकल बा। मंत्रालय भी नया विकल्प खोजे के बजाय उहे अधिकारी के अतिरिक्त शाखा में बइठा के रखले बा, जवन स्थिति के अउरी बिगाड़त बा।
एक तरफ वीरगंज बिना नेतृत्व के परेशान बा, त दोसरा तरफ सरकार के रवैया से साफ झलकत बा कि ऊ शहर के प्रति जिम्मेदारी से बच रहल बा। एह स्थिति के सबसे जादे असर आम जनता आ निचला स्तर के कर्मचारी पर पड़ रहल बा।
पिछला ३ महीना से कर्मचारी लोग के तनख्वाह ना मिलल बा, जेसे उनका घर में चूल्हा जले में दिक्कत हो रहल बा। पेट्रोल पंप के भुगतान ना होखे से महानगर के गाड़ी के ईंधन मिलना बंद हो गइल बा, जवना से सफाई गाड़ी भी ठप पड़ गइल बा आ शहर में कचरा उठाव में समस्या बढ़ गइल बा।
बिगड़ल वीरगंज, सुस्त प्रशासन
सड़क डिभिजन कार्यालय द्वारा मुख्य सड़क किनारे घर-ढांचा गिरावल जाए के बाद शहर धूल-माटी से भर गइल बा। एहसे पानी आ बिजली सेवा भी प्रभावित भइल बा। जनता के राहत देवे के जिम्मेदारी वाला महानगर खुद आर्थिक संकट में फंसल बा।
आर्थिक अधिकार ना होखे से बुजुर्ग, अपंग आ असहाय लोग के सामाजिक सुरक्षा भत्ता भी बंद हो गइल बा, जेसे ऊ लोग भारी परेशानी में बा। जानकारी अनुसार, महानगर पर करीब १ अरब रुपिया से जादे के वित्तीय बोझ बा।
सालाना करीब ७० करोड़ के आमदनी वाला महानगर द्वारा जरूरत से जादे दायित्व उठावल गइल, लेकिन संघीय सरकार आ नियामक निकाय के चुप्पी से स्थिति अउरी खराब हो गइल बा।
सरकार के प्रवक्ता नीता पोखरेल अर्याल के ‘जानकारी नइखे’ कहके पल्ला झाड़ लेवे से सरकार के गैरजिम्मेदारी साफ दिखत बा।
अब सवाल उठत बा कि सुशासन के वादा करे वाला नेता लोग वीरगंज के एह हालत पर काहे चुप बा? मधेस के इकलौता महानगर के एतना बुरा हाल काहे भइल बा?
अगर जल्द से जल्द नया प्रमुख प्रशासनिक अधिकरी भेज के आर्थिक आ प्रशासनिक समस्या के हल ना निकालल गइल, त बढ़त जनआक्रोश के जिम्मेदारी संघीय सरकार पर आई, एही बात स्थानीय लोग कह रहल बा।
मेयर राजेशमान सिंह के कहना बा कि शुरुआत में समन्वय ना होखे से ऊ अधिकारी के हाजिर ना करवलन, लेकिन अब सरकार जवनो अधिकारी भेजी, ऊ काम करावे के लिए तैयार बाड़ें। उन्होंने मंत्रालय से जल्दी अधिकारी भेजे के मांग भी कइले बाड़ें, लेकिन अब तक कवनो जवाब नइखे मिलल।

