काठमांडू — नेपाल आ भारत के बीच फौजदारी अपराध नियंत्रण आ कानुनी प्रक्रिया में सहयोग बढ़ावे के उद्देश्य से ‘पारस्परिक कानुनी सहायता समझौता’ प्रतिनिधि सभा में पेश कइल गइल बा। बुध के भइल बैठक में कानून, न्याय आ संसदीय मामिला मंत्री सोबिता गौतम एह महत्वपूर्ण समझौता के सदन के सामने प्रस्तुत कइली।
एह समझौता के मुख्य लक्ष्य सीमा पार होखे वाला अपराध पर नियंत्रण पावल आ दुन्नो देश के अपराधी लोग के कानून के दायरा में लियावल बा। मंत्री गौतम बतवली कि एह समझौता से भ्रष्टाचार करके पड़ोसी देश में संपत्ति लुकावे के प्रवृत्ति पर बड़ा प्रहार होई।
उनकर कहना बा कि अब भ्रष्टाचार या दोसरा अपराध से कमाइल अवैध धन आ चल–अचल संपत्ति जेकरा के दोसरा देश में छिपावल गइल बा, ओहके कानूनी प्रक्रिया से जब्त करके वापस लियावल आसान हो जाई।
मंत्री गौतम ई भी बतवली कि ई समझौता खाली संपत्ति वापसी तक सीमित ना बा, बलुक ‘मनी लाउन्डरिंग’ (संपत्ति शुद्धीकरण) के खिलाफ चल रहल अभियान में एगो मजबूत कड़ी साबित होई। एहसे अपराधी लोग के एक देश में अपराध करके दुसरका देश में शरण लेवे या निवेश करे के प्रवृत्ति पर रोक लागी।
एह समझौता से दुन्नो देश के जांच अधिकारी लोग के प्रमाण जुटावे, गवाह के बयान लेवे आ अदालती प्रक्रिया में एक-दूसरा के सीधा सहयोग करे के कानूनी आधार मिल जाई। खास करके जटिल फौजदारी मामिला में न्याय प्रक्रिया के तेज आ प्रभावी बनावे में ई समझौता महत्वपूर्ण साबित होखे के उम्मीद बा।

