वीरगञ्ज। नेपाल के संविधान हर नागरिक के बिना हथियार शांति से जुटे आ आपन बात रखे के मौलिक अधिकार देले बा। कानून के पालन करवावल आ विधि के शासन कायम रखल राज्य के जिम्मेदारी होला। बाकिर पर्सा जिला के प्रशासन आ सुरक्षा निकाय के कामकाज एतना विरोधाभासी देखल गइल बा कि खुद राज्ये कानून आ नागरिक अधिकार के मजाक बना देले बा।
जिला प्रशासन कार्यालय एक ओर से सर्त के साथ शांति से कार्यक्रम आ पूजा करे के आधिकारिक अनुमति देला, लेकिन उहे राज्य के दोसरा इकाई पुलिस कार्यक्रम शुरू होखे से एक दिन पहिले रात में होटल से पकड़ लेला—ई अजीब आ “नौटंकी” जइसन स्थिति वीरगञ्ज में देखे के मिलल।
‘राष्ट्र, राष्ट्रियता, धर्म, संस्कृति आ नागरिक बचाउ महाअभियान नेपाल’ के संयोजक दुर्गा प्रसाईं के सोमबार रात में वीरगञ्ज के ‘होटल सिद्धार्थ दियालो’ से पुलिस नियंत्रण में ले लिहलस, जवन राज्य के निर्णय आ सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर देले बा।
अनुमति के स्याही सुखाए से पहिले गिरफ्तारी
सबसे चौंकावे वाली बात ई बा कि जिला प्रशासन पर्सा के आधिकारिक पत्र (चलानी नं. ५६९९) में साफ-साफ लिखल रहे कि प्रसाईं के कार्यक्रम के अनुमति बा—गहवामाई मंदिर में बिना जुलूस पूजा करे आ नारायणी रंगशाला में सभा करे के।
प्रशासन एक तरफ सेना, पुलिस, सशस्त्र पुलिस आ अनुसन्धान विभाग सबके जानकारी देके सुरक्षा के व्यवस्था करे के आदेश देला, आ दोसरा तरफ उहे रात में पुलिस भेज के होटल से पकड़वा देला। ई दोहरापन साफ देखावत बा कि प्रशासन आ पुलिस के बीच तालमेल के भारी कमी बा, जवन विधि के शासन पर सवाल खड़ा कर रहल बा।
कवन कानून के आधार पर मौलिक अधिकार पर चोट?
कार्यक्रम अनुसार प्रसाईं के मंगर सबेरे गहवामाई मंदिर में पूजा करे के रहे। बाकिर रात में पकड़ाइल के चलते पूरा कार्यक्रम रद्द हो गइल।
पुलिस गिरफ्तारी पुर्जी त देलस, बाकिर शुरुआत में ई साफ ना कइलस कि कवन कानून के तहत पकड़ल गइल बा। बाद में डीएसपी हरिबहादुर बस्नेत कहलें कि “साधारण पूछताछ” खातिर नियंत्रण में लिहल गइल बा।
अब सवाल उठता—जवन आदमी प्रशासन से अनुमति लेके होटल में शांतिपूर्वक ठहरल रहे, ओकरा के आधी रात में पकड़ल कवन कानून में लिखल बा? ई मामला अब नागरिक अधिकार आ स्वतंत्रता पर गंभीर बहस बन गइल बा।
समर्थक नाराज, सरकार पर आरोप
हाल के समय में बैंक आ वित्तीय संस्था के खिलाफ आक्रामक रुख अपनावे वाला प्रसाईं के गिरफ्तारी से उनका समर्थक लोग में भारी आक्रोश बा। ऊ लोग ई कदम के राजनीतिक बदला आ “कायरतापूर्ण नौटंकी” बतावत होटल आ पुलिस कार्यालय लगे नारा लगावत रहल।
एह घटना से ई सवाल उठता कि प्रशासन के अनुमति देवे आ पुलिस के गिरफ्तारी करे के ई कदम पहले से तय रहे या अंदरूनी कमजोरी के नतीजा बा। जवन भी होखे, ई घटना नेपाल के कानून व्यवस्था आ मानव अधिकार के स्थिति के कमजोर आ मजाक जइसन बना देले बा।
अभी संभावित तनाव के देखते वीरगञ्ज में सुरक्षा काफी कड़ा क दिहल गइल बा।

