भारत के सीमावर्ती शहर रक्सौल स्थित प्राचीन सूर्य मन्दिर परिसर के पोखरी से करीब ११ किलो वजन के विशाल कछुआ मिलल बा। ई घटना के बाद पूरा इलाका में कौतुहलता आ चर्चा के माहौल बन गइल बा।
सूर्य मन्दिर के जीर्णोद्धार आ सौंदर्यीकरण के तहत पोखरी के सफाई करत घरी ई कछुआ देखल गइल। एकरा बाद श्रद्धालु आ स्थानीय लोग के भीड़ जुट गइल, ई जानकारी सूर्य मन्दिर समिति के मिडिया प्रवक्ता आ समाजसेवी रजनीश प्रियदर्शी देलें।
बिअफे के दिन कछुआ मिलला के चलते कई श्रद्धालु एकरा भगवान विष्णु के कूर्म अवतार से जोड़त शुभ संकेत मान रहल बाड़े। धार्मिक मान्यता अनुसार कछुआ धैर्य, स्थिरता, समृद्धि आ सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक मानल जाला।
सूर्य मन्दिर समिति के सचिव शम्भु प्रसाद चौरसिया, कोषाध्यक्ष गणेश अग्रवाल समेत अन्य सदस्य लोग कहले बाड़े कि आस्था के केंद्र में एतना विशाल कछुआ मिलना प्रकृति आ धार्मिक चेतना के अद्भुत संगम ह।
पर्यावरणविद् लोग के अनुसार कछुआ जलस्रोत के संरक्षण आ पारिस्थितिक संतुलन बनावे में महत्वपूर्ण भूमिका निभावेला। एही बात के ध्यान में राखत समिति श्रद्धालु लोग से पोखरी में पूजा सामग्री आ कचरा ना फेंके के अपील कइले बा।
समिति के प्रवक्ता रजनीश प्रियदर्शी के कहना बा कि ई विशाल कछुआ ई संदेश देत बा कि “जब प्रकृति सुरक्षित रहेला, त आस्था आ जीवन दुनो के संतुलन बनल रहेला।”

