जनकपुरधाम । मधेश प्रदेश सरकार के सत्ता समीकरण में भइल अचानक बदलाव आ सत्ता से बाहर होखे के पीड़ा के बीच, मधेश केन्द्रित दूगो प्रमुख राजनीतिक ताकत के बीच ऐतिहासिक ध्रुवीकरण के तैयारी शुरू हो गइल बा। उपेन्द्र यादव के नेतृत्व वाला जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) नेपाल आ सिके राउत के नेतृत्व वाला जनमत पार्टी के बीच पार्टी एकता खातिर सघन बातचीत आ गृहकार्य शुरू हो गइल बा।
मधेश प्रदेश सरकार के नेतृत्व आ सत्ता से बाहर होखे के बादे, दूनो दल के शीर्ष नेता आपन अस्तित्व बचावे आ नया राजनीतिक मोर्चाबंदी बनावे खातिर संवाद में जुट गइल बाड़ें। पिछला कुछ दिन से अनौपचारिक बातचीत में रहल जसपा नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव आ जनमत के अध्यक्ष सिके राउत के बीच बिअफे के काठमाडौँ में दिनभर सकारात्मक आ निर्णायक वार्ता भइल, सूत्र बतावत बा।
राजनीतिक रूप से उपेन्द्र यादव आ सिके राउत अबले मधेश के जमीन पर एक-दूसरा के कट्टर प्रतिद्वन्द्वी मानल जात रहल बाड़ें। २०७९ साल के प्रतिनिधि सभा चुनाव में सप्तरी क्षेत्र नं. २ से डा. राउत, मधेश आंदोलन के अगुआ मानल जाए वाला यादव के भारी मत से हरवले रहले, जवन से दूनो के बीच टकराव चरम पर पहुँच गइल रहे।
एह बाद बारा में भइल उपनिर्वाचन में भी यादव के संसद में जाए से रोके खातिर जनमत पार्टी आपन पूरा ताकत लगा दिहलस। मधेश के राजनीति में वर्चस्व खातिर लड़ाई के केन्द्र में रहल ई दूनो नेता अब बदलल संघीय आ प्रादेशिक हालात के कारण पुरान कड़वाहट भुला के एक साथ आवे के कोशिश करत बाड़ें, जवन राजनीतिक हल्का में काफी चास आ आश्चर्य के विषय बनल बा।
जसपा नेपाल के एगो वरिष्ठ नेता के अनुसार, बिहीबार के बैठक में पार्टी एकीकरण के सैद्धान्तिक, नीतिगत आ संगठनात्मक मुद्दा पर शुरुआती बातचीत भइल बा। ऊ कहलन, “अभी दूनो दल सत्ता से बाहर बाड़ें। मधेश के भावना आ अधिकार के आंदोलन के फेर से मजबूत करे खातिर एकजुट होखे के अलावा कवनो विकल्प नइखे, ई बात दूनो नेतृत्व महसूस करत बा।”
एहसे पहिले भी मधेश केन्द्रित दलन के बीच ‘संघीय लोकतांत्रिक मोर्चा’ के माध्यम से एकता के कोशिश भइल रहे, बाकिर नेतृत्व बंटवारा, पद के अहंकार आ निजी राजनीतिक स्वार्थ के चलते ऊ कोशिश सफल ना हो पावल। अब दूनो दल के अध्यक्ष ई तय करे में लागल बाड़ें कि कइसन मोडालिटी आ शक्ति संतुलन के आधार पर पार्टी के एकीकृत कइल जाव।
नया सत्ता समीकरण से मधेश के क्षेत्रीय दलन के किनारे करे के कोशिश भइल बा, ई साझा निष्कर्ष निकालत, अगर उपेन्द्र यादव आ सिके राउत एक हो जात बाड़ें, त एहसे मधेश प्रदेश के राजनीति आ आगे के राष्ट्रीय राजनीति पर दूरगामी आ मजबूत प्रभाव पड़ सकेला।

