वीरगंज । मजबूत इच्छाशक्ति, अटूट साहस आ कठिन मेहनत के आगे दुनिया के सबसे मुश्किल चुनौती भी छोट पड़ जाला—ई बात के साबित करत, प्रिती अग्रवाल रतैरिया दुनिया के सबसे ऊँच चोटी सगरमाथा (८,८४८.८६ मीटर) पर सफल चढ़ाई कइले बाड़ी। एह ऐतिहासिक सफलता के साथ ऊ ना सिर्फ नेपाल, बल्कि पूरा मारवाड़ी समाज के इतिहास में एगो नया सुनहरा अध्याय जोड़ दिहले बाड़ी।
सुनसरी जिला के धरान में जन्मल आ अभी काठमाडौँ में रहत प्रिती अग्रवाल रतैरिया नेपाल के इतिहास में सगरमाथा पर चढ़े वाली पहिली मारवाड़ी महिला बन गइली बाड़ी। कमलेश अग्रवाल रतैरिया आ जाना कुमारी अग्रवाल मित्तल के बेटी प्रीति के एह उपलब्धि से ना सिर्फ नेपाल, बल्कि दुनियाभर में बसल अग्रवाल-मारवाड़ी समाज के सिर गर्व से ऊँच हो गइल बा।
दुनियाभर में दुसरी मारवाड़ी महिला के कीर्तिमान
इतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक, प्रिती अग्रवाल रतैरिया शायद दुनिया भर में सगरमाथा चढ़े वाली दुसरी मारवाड़ी महिला बाड़ी। नेपाल के संदर्भ में त ऊ पहिली महिला हई, जवन एह ऊँचाई तक पहुँचल बाड़ी।
मारवाड़ी समाज, जवन अधिकतर व्यापार आ सामाजिक गतिविधियन में सक्रिय रहे ला, ओहमें से अइसन साहसिक खेल में महिला के एह उपलब्धि के बहुत बड़ा उपलब्धि मानल जा रहल बा। बुद्धिजीवी आ समाजसेवी लोग एह जीत के “हौसला के उड़ान” के नाम दे रहल बा।
“तूसे ना होई” कहे वाला लोग के करारा जवाब
प्रिती अग्रवाल रतैरिया के एह सफलता से समाज में महिलन के लेके बनल पुरान आ संकुचित सोच पर जोरदार चोट लागल बा। अक्सर महिलन के कह दिहल जाला—“तूसे ना होई”—बाकिर प्रीति एह सोच के पूरी तरह बदल दिहली बाड़ी।
सगरमाथा के कठिन रास्ता, खराब मौसम आ ऑक्सीजन के कमी जइसन खतरनाक हालात के पार करत ऊ साबित कइली बाड़ी कि अगर हिम्मत आ मेहनत होखे, त महिला भी हर ऊँचाई छू सकेली।
चारो ओर खुशी, नई पीढ़ी खातिर प्रेरणा
एह ऐतिहासिक सफलता के बाद प्रिती अग्रवाल रतैरिया के परिवार, रतैरिया परिवार आ पूरा मारवाड़ी-अग्रवाल समाज में खुशी के माहौल बा।
सोशल मीडिया पर लोग बधाई देत लिखत बा—
“अब केहू मत कहो—तूसे ना होई, काहे कि जवन कवनो ना कर पावल, ऊ हम कर सकीले।”
प्रीति के ई उपलब्धि ना सिर्फ आज के समय के गर्व बा, बल्कि आवे वाला पीढ़ी खातिर एगो प्रेरणा के दीप जइसन हमेशा चमकत रही।

