मधेस प्रदेश, जे देश के प्रमुख गहूँ उत्पादन क्षेत्र के रूप में जानल जाला, एह साल गहूँ उत्पादन में खासा गिरावट देखल गइल बा। खराब मौसम, रोग आ कीरा के प्रकोप, सिँचाई सुविधा के कमी आ गुणस्तरीय बीउ के अभाव के कारण उत्पादन घटल बा, ए बात कृषि अधिकारी लोग बतवले बा।
मधेस प्रदेश कृषि निर्देशनालय, नक्टाझिज धनुषा के अनुसार चालू आर्थिक वर्ष में पूरा प्रदेश में 3 लाख 732 हेक्टर जमीन पर गहूँ के खेती भइल, जवना में प्रति हेक्टर 1.8 मेट्रिक टन के हिसाब से कुल 5 लाख 43 हजार 160 मेट्रिक टन गहूँ उत्पादन भइल बा।
पिछला साल प्रदेश में 1 लाख 78 हजार 433 हेक्टर जमीन पर खेती होके प्रति हेक्टर 3.37 मेट्रिक टन के दर से 7 लाख 31 हजार मेट्रिक टन गहूँ उत्पादन भइल रहे। एह आधार पर देखल जाव त एह साल उत्पादन में साफ तौर पर गिरावट आइल बा।
निर्देशनालय के बागबानी विकास अधिकृत किरण विश्वकर्मा के अनुसार जिला अनुसार सबसे ज्यादा गहूँ उत्पादन धनुषा जिला में भइल बा। धनुषा में 33 हजार 500 हेक्टर जमीन पर खेती होके 98 हजार 490 मेट्रिक टन गहूँ उत्पादन भइल बा।
ओही तरह सप्तरी में 82 हजार 320 मेट्रिक टन, महोत्तरी में 72 हजार 800 मेट्रिक टन, बारा में 71 हजार 920 मेट्रिक टन, सर्लाही में 69 हजार 596 मेट्रिक टन, पर्सा में 59 हजार 852 मेट्रिक टन, रौतहट में 52 हजार 741 मेट्रिक टन आ सिरहा में 35 हजार 441 मेट्रिक टन गहूँ उत्पादन भइल बा।
मधेस प्रदेश कृषि निर्देशनालय के निर्देशक जितेन्द्र यादव के कहना बा कि एह साल उत्पादन घटे के मुख्य कारण असमय मौसम बदलाव, रोग आ कीरा के बढ़त प्रकोप, पर्याप्त सिँचाई के कमी आ गुणस्तरीय बीउ के आसानी से उपलब्ध ना हो पावल बा।
कृषि क्षेत्र से जुड़ल लोगन के कहना बा कि उत्पादन बढ़ावे खातिर आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, सिँचाई ढांचा के विस्तार, उन्नत बीउ के उपलब्धता आ किसान लोग के समय पर प्राविधिक सहायता बहुत जरूरी बा।

