आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/०८४ खातिर तय संवैधानिक समय सीमा के भीतर देश भर के १४ गो नगरपालिकन बजट पेश करे में असफल रहलें।
नेपाल नगरपालिका संघ के मुताबिक, देश के कुल २९३ महानगरपालिका, उपमहानगरपालिका आ नगरपालिकन में से ९५ प्रतिशत यानी २७९ स्थानीय तह असार १० तारीख के भीतर अपना-अपना नगरसभा में बजट पेश करके कानूनी जिम्मेदारी पूरा क लिहलें। बाकिर ५ प्रतिशत स्थानीय तह आंतरिक राजनीतिक खींचतान, प्रशासनिक अस्पष्टता आ तकनीकी दिक्कत के चलते बजट ना ला सकलें।
प्रादेशिक स्थिति देखल जाव त मधेस प्रदेश के हालत सबसे जादे चिंताजनक बा। एह प्रदेश के कुल ७७ नगरपालिकन में से १० गो स्थानीय तह बजट पेश करे में असफल रहलें। बजट ना ला सके वाला में रौतहट के चार (गरुड़ा, गढीमाई, कटहरिया आ फतुवा विजयपुर), धनुषा के तीन (जनकपुरधाम उपमहानगर, कमला आ विदेह), सर्लाही के हरिवन, सिराहा के सुखीपुर आ महोत्तरी के जलेश्वर नगरपालिका शामिल बाड़ें।
अन्य प्रदेशन के तुलना में कोशी, बागमती, गण्डकी आ सुदूरपश्चिम प्रदेश के प्रदर्शन संतोषजनक रहल बा। कोशी के धरान उपमहानगरपालिका, बागमती के मेलम्ची नगरपालिका, गण्डकी के बागलुङ नगरपालिका आ सुदूरपश्चिम के टीकापुर नगरपालिका ही समय पर बजट पेश ना कर सके वाला सूची में बाड़ें। दोसरा ओर लुम्बिनी आ कर्णाली प्रदेश १०० प्रतिशत नतीजा देके बजट पेश करे में उदाहरण पेश कइले बाड़ें।
संवैधानिक प्रावधान अनुसार हर साल असार १० तारीख तक बजट पेश कइल जरूरी होला। समय पर बजट ना आवे से स्थानीय तह के सालाना आर्थिक योजना पर असर पड़ेला, साथे-साथ संघीय आ प्रादेशिक सरकार से मिलल अनुदान आ राजस्व बांट के प्रक्रिया में भी गंभीर प्रशासनिक आ कानूनी दिक्कत खड़ा हो सकेला, एह बात के विशेषज्ञ लोग बतावत बा।

