युवा नेतृत्व में भइल आंदोलन के चलते भारत के शिक्षामंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफा देला के दू हफ्ता बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़त नजर आ रहल बा।
परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक आ अनियमितता के खिलाफ शुरू भइल आंदोलन देशभर में फैल गइल, जेकरे बाद प्रधान २५ जुलाई के आपन पद से इस्तीफा दे देले रहलें। ‘कक्रोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू भइल प्रदर्शन कई शहरन में फैल गइल रहे।
आंदोलन के मुख्य मांग में शिक्षामंत्री के इस्तीफा, परीक्षा प्रणाली में सुधार आ प्रदर्शनकारी लोग पर भइल कार्रवाई वापस लेवे के बात शामिल रहल। सरकार आ आंदोलनकारी लोग के बीच सहमति बनला के बाद आंदोलन धीरे-धीरे शांत हो गइल। सरकार परीक्षा प्रणाली सुधार आ संबंधित मुद्दा वापस लेवे के भरोसा देले बा।
युवा असंतोष अब खुल के सामने
परीक्षा गड़बड़ी से शुरू भइल आंदोलन अब बेरोजगारी, रोजगार के कमी आ युवा भविष्य से जुड़ल मुद्दा पर केंद्रित हो गइल बा। एहसे युवा लोग के बीच सरकार आ सार्वजनिक संस्था पर भरोसा पर सवाल उठे लागल बा।
करीब दस साल से मजबूत नेतृत्व के छवि बनवले मोदी सरकार खातिर जनता के दबाव में एगो मंत्री के इस्तीफा बड़ा राजनीतिक घटना मानल जा रहल बा। सरकार कहले बा कि प्रश्नपत्र लीक रोके खातिर कड़ा कानून आ परीक्षा प्रणाली सुधार पर काम हो रहल बा, हालांकि आंदोलन के दौरान पुलिस पर ज्यादा बल प्रयोग के आरोप भी लागल।
सोशल मीडिया बनल मुख्य हथियार
ई आंदोलन में सोशल मीडिया के भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रहल। सीजेपी ऑनलाइन माध्यम से युवा लोग के जोड़ के आंदोलन के देशभर में फैलवले।
प्रदर्शन के दौरान निगरानी खातिर एआई तकनीक वाला कैमरा के इस्तेमाल भी चर्चा में रहल। कुछ महिला प्रदर्शनकारी बतवली कि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल भइला के बाद ऊ लोग ऑनलाइन धमकी आ दुर्व्यवहार के सामना कइली।
नई दिल्ली में प्रदर्शन क्षेत्र के आसपास इंटरनेट बंद कर दिहल गइल, जेकरे चलते आंदोलनकारी लोग के बीच संपर्क में दिक्कत आइल। बाद में ऊ लोग वैकल्पिक डिजिटल माध्यम अपनवले।
अभी चुनावी राजनीति में ना जाई सीजेपी
आंदोलन के अगुवाई करे वाला ‘कक्रोच जनता पार्टी’ फिलहाल चुनावी राजनीति में ना जाए के संकेत देले बा। पार्टी नेता अभिजीत दिप्के के अनुसार अभी फोकस युवा समस्या, शिक्षा सुधार आ सार्वजनिक संस्था में जवाबदेही बढ़ावे पर बा।
ई आंदोलन से साफ संकेत मिल रहल बा कि भारत में युवा वर्ग के प्रभाव तेजी से बढ़त बा। आगे चलके ई असंतोष राजनीतिक ताकत में बदलेला कि ना, ई मोदी सरकार खातिर एगो बड़ा चुनौती बन सकेला।

