काठमांडू । नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) के संयोजक पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ बालेन शाह के नेतृत्व वाला वर्तमान सरकार के अपरिपक्व, राजनीतिक रूप से दिशाहीन आ ‘कम्पास भुलाइल जहाज’ जइसन बतवले बाड़ें। हालांकि, दसहरा–सोहरैया लगत्ते सरकार गिर जाए के चर्चा के ऊ निराधार आ हावादारी टिप्पणी बतवले।
सोमार के सिंहदरबार में संसदीय मामिला के पत्रकार लोग से विशेष अन्तरक्रिया में संयोजक प्रचण्ड देश के पछिला राजनीतिक घटनाक्रम, सरकार के कार्यशैली, संविधान संशोधन के प्रस्ताव आ आगे हो सके वाला राजनीतिक सहकार्य के बारे में आपन धारणा रखले।
छलफल के दौरान प्रचण्ड बतवले कि राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के सभापति रवि लामिछाने से लगातार संवाद हो रहल बा। ऊ पछिला समय में रवि में राजनीतिक परिपक्वता बढ़ल महसूस भइल बतवले।
संकट के समय में अपना ओर से रवि के पक्ष में संसद, सार्वजनिक मंच आ जेल तक पहुंच के आवाज उठावल याद करत प्रचण्ड कहले कि सामाजिक सञ्जाल आ आन्दोलन के बल पर बनल जनाधार दीर्घकालीन राजनीतिक संगठन में बदल पाई कि ना, ई सवाल अबहियो कायम बा। रास्वपा ओर आकर्षित आम जनता में भी अब पुनर्विचार के लहर देखे के मिल रहल बा, ऊ बतवले।
सरकार के ओर से आगे बढ़ावल संविधान संशोधन सम्बन्धी बहसपत्र पर कड़ा आपत्ति जनावत प्रचण्ड प्रस्तावना से ही संविधान के मूलभूत प्रावधान बदलल संशोधन ना, बल्कि संविधान पुनर्लेखन के प्रयास होखे के आरोप लगवले। अभ्यास के दौरान देखाइल कुछ प्राविधिक कमजोरी सुधारल जा सकेला, बाकिर संविधान के मूल आत्मा बदले के कोशिश ना करे के चाहीं, उनकर तर्क रहल।
लोकतान्त्रिक गणतन्त्र, संघीयता, समावेशिता आ राष्ट्रिय स्वाधीनता जइसन ऐतिहासिक उपलब्धि पर चारों ओर से चुनौती देखाइल उल्लेख करत ऊ देश में ‘खतरा के घंटी बज गइल बा’ कहके चेतावनी देले।
वर्तमान राजनीतिक संकट खातिर दोसर लोग के दोष देवे के बजाय राजनीतिक दलन के अपना अतीत के समीक्षा करे के चाहीं, प्रचण्ड जोर देले। गणतन्त्र प्राप्ति के बाद दल सरकार बनावे आ गिरावे के फोहोरी खेल में उलझल स्वीकार करत ऊ कहलें कि अब राजनीतिक मैदान डिजिटल माध्यम, सामाजिक सञ्जाल आ एआई ओर मुड़ गइल बा। एही कारण परम्परागत जुलुस आ सड़क आन्दोलन के शैली में बदलाव जरूरी बा।
बहुधार्मिक देश में धर्मनिरपेक्षता हटावे के बहस स्वीकार्य ना हो सकेला आ प्रदेशन के कमजोर बनवला से संघीयताविरोधी तत्व के प्रोत्साहन मिली, प्रचण्ड के ठहर बा।
एही बीच, नेकपा (एमाले) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली से भइल पछिला सहकार्य के भविष्य समय के साथ तय होखी बतावत प्रचण्ड नेपाली कांग्रेस के पूरा तरह ‘माइनस’ करके आगे बढ़े के पक्ष में ना रहल स्पष्ट कइले।
“राष्ट्र ही गंभीर संकट में पड़ गइल त हमनी के व्यक्तिगत अधिकार के कवनो अर्थ ना रह जाई,” कहत प्रचण्ड संविधान आ लोकतन्त्र के रक्षा खातिर व्यापक राष्ट्रिय एकता के आह्वान कइले।

