वीरगंज। नेपाल में बालिका बलात्कार के घटना हर साल गंभीर रूप लेत जा रहल बा। नेपाल प्रहरी के तथ्यांक के मुताबिक, पिछिला पाँच आर्थिक बरिस में औसतन हर साल १० साल से कम उमिर के करीब २५० लइकी बलात्कार के शिकार भइल बाड़ी।
१० साल से कम उमिर के बालिकन पर होखे वाला बलात्कार के संख्या में बहुत बड़ बदलाव नइखे आइल, बाकिर ई आंकड़ा बेहद चिंताजनक बा। आर्थिक बरिस २०७८/७९ में १० साल से कम उमिर के २६८ लइकी बलात्कार के शिकार भइल रहली। ओकरा बाद २०७९/८० में २५९, २०८०/८१ में २५२ आ २०८१/८२ में २१७ के संख्या रहल। आर्थिक बरिस २०८२/८३ में फेर बढ़के ई संख्या २२१ हो गइल।
१० साल से कम उमिर के पीड़ित आ आरोपी दुनो नाबालिग
१० साल से कम उमिर के लइकी पीड़ित होखे के क्रम गंभीर बा, साथही एही उमिर के बालक लोग के भी अइसन अपराध में शामिल होखे के घटना सामने आ रहल बा। प्रहरी के तथ्यांक अनुसार आर्थिक बरिस २०८२/८३ में १० साल से कम उमिर के ७ बालक पर बलात्कार के कसूर में मुद्दा चलल। एहसे पहिले २०८१/८२ में २, २०८०/८१ में १६, २०७९/८० में २ आ २०७८/७९ में ३ बालक पर अइसन अभियोग लागल रहे।
हालही में बारा के जीतपुरसिमरा–१ में तीन बरिस के एगो बालिका के बलात्कार के बाद हत्या के घटना में १६ बरिस के एगो किशोर के संलग्नता बतावल गइल। घटना में पीड़िता के जान-पहचान वाला लोग पर भी आरोप लागल।
घर के आसपास आ जान-पहचान के लोग से बालिकन के असुरक्षित होखे के ई घटना अकेले उदाहरण नइखे। देश के अलग-अलग हिस्सा में पड़ोसी, शिक्षक, परिचित आ पहुँच वाला लोग पर भी बालिका के शोषण के आरोप सामने आवत रहल बा।
हर साल करीब २४ सय लोग बलात्कार के शिकार
बलात्कार जइसन गंभीर अपराध के दर भी चिंता के विषय बा। प्रहरी के आंकड़ा अनुसार हर साल औसतन करीब २४ सय लोग बलात्कार के शिकार होखेलन।
आर्थिक बरिस २०८२/८३ में कुल २ हजार ३९५ लोग बलात्कार के शिकार भइल। एहमें १८ बरिस से कम उमिर के बालिका के संख्या १ हजार ५१० रहल, जबकि १८ बरिस से ऊपर के महिला के संख्या ८८५ रहल।
२०८१/८२ में बलात्कार पीड़ित के कुल संख्या २ हजार २६२ रहल, जवना में १८ बरिस से कम उमिर के १ हजार ४३७ बालिका रहली। ८२५ जना १८ बरिस से ऊपर के महिला रहली।
२०८०/८१ में कुल २ हजार ५१४ लोग बलात्कार के शिकार भइल, जवना में १८ बरिस से कम उमिर के १ हजार ५९२ बालिका आ ९२० महिला रहली।
पूर्व प्रहरी वरिष्ठ उपरीक्षक दिनेशराज मैनाली के मुताबिक, पीड़ित आ आरोपी दुनो के नाबालिग होखे के घटना बाल-बच्चन के पारिवारिक पालन-पोषण, संगत आ सही यौन शिक्षा के कमी के ओर संकेत करेला।
डिजिटल प्रभाव आ पारिवारिक समस्या से किशोरन पर असर
मनोचिकित्सक लोग के मुताबिक किशोर उमिर में होखे वाला गंभीर आपराधिक घटना खाली कानुनी समस्या नइखे, ई सामाजिक आ मानसिक विकास से जुड़ल गंभीर विषय भी बा।
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा. अनन्तप्रसाद अधिकारी के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध हिंसात्मक आ उत्तेजक सामग्री के असर किशोरन के व्यवहार पर पड़ सकेला। नया चीज आजमावे आ जोखिम वाला व्यवहार करे के प्रवृत्ति भी कुछ किशोरन में बढ़ सकेला।
एकरा अलावा परिवार में टूटन, अभिभावक के कमजोर निगरानी, सामाजिक मूल्य-मान्यता में गिरावट आ शिक्षा प्रणाली में कमी जइसन कारण भी बाल मनोविज्ञान पर असर डाल सकेला। किशोरावस्था में भावनात्मक उतार-चढ़ाव आ असामाजिक व्यवहार के प्रवृत्ति के समय सही मार्गदर्शन आ सहयोग बहुत जरूरी बा।
बारा में तीन बरिस के बालिका के बलात्कार के बाद हत्या के घटना से देशभर में आक्रोश बढ़ल। एकरा बाद अइसन अपराध में कड़ा से कड़ा सजा देवे के मांग उठे लागल। सरकार आ पीड़ित पक्ष के बीच कानून संशोधन से जुड़ल तीन बिंदु पर सहमति भी भइल।
सहमति के मुताबिक, अइसन जघन्य अपराध में सजा के दायरा के पुनरावलोकन करे खातिर कानून, न्याय तथा संसदीय मामिला मंत्रालय के सात दिन के भीतर प्रतिवेदन पेश करे के जिम्मेदारी देहल गइल आ सात सदस्यीय ‘गरिमा न्याय संकल्प समिति’ बनावे के निर्णय भइल।
मौजूदा कानुनी व्यवस्था आ सजा
बालिका बलात्कार आ हत्या जइसन गंभीर अपराध के घटना के बाद मृत्युदंड देवे के मांग उठत रहल बा। बाकिर नेपाल के संविधान मृत्युदंड के सजा के पूर्ण रूप से निषेध करेला।
हाल में लागू मुलुकी अपराध संहिता, २०७४ के दफा २१९ में बलात्कार के अपराध खातिर पीड़ित के उमिर के आधार पर अलग-अलग कैद सजा के कानुनी व्यवस्था बा।
मौजूदा कानुनी व्यवस्था के सजा कम कड़ा होखे के बात कहत जनता में कड़ा सजा के मांग बढ़ रहल बा। अब ‘गरिमा न्याय संकल्प समिति’ के प्रतिवेदन के आधार पर कानून में कइसन बदलाव होई, एह पर सबकर नजर बा।

