नेपाल के संसदीय राजनीति के ‘भीष्म पितामह’ मानल जाए वाला केपी शर्मा ओली के अपराजित विरासत के तोड़त झापा निर्वाचन क्षेत्र नंबर ५ में एह बेर अइसन राजनीतिक भूकम्प आइल बा, जेकर असर काठमांडू के सत्ता गलियारा तक महसूस कइल जा रहल बा।
लमहर समय से नेकपा (एमाले) के किला मानल जाए वाला एह क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के उम्मीदवार बालेन शाह ऐतिहासिक आ अप्रत्याशित जीत हासिल कइले बाड़ें। आखिरी मतगणना अनुसार, बालेन ५२ हजार ६ सय ८ मत पाकर संसद तक के यात्रा पक्का कइले बाड़ें, जबकि हेभिवेट नेता ओली ३२ हजार ३ सय ५४ मत पर सिमट गइले। करीब २० हजार मत के भारी अंतर से बालेन के जीत नेपाली राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होखे के संकेत देत बा।
ई चुनाव खाली हार-जीत के आंकड़ा भर ना रहल, बल्कि नेपाली मतदाता के बदलत मनोविज्ञान के आईना बन गइल बा। काठमांडू महानगर के सफल नेतृत्व के बाद संघीय राजनीति में आवे से पहिले मेयर पद से इस्तीफा देके मैदान में उतरल बालेन खातिर रास्वपा उनकरा के भावी प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत कइले रहल। झापा–५ के नतीजा से साफ हो गइल कि ई दांव खाली सफले ना भइल, बल्कि पारंपरिक राजनीतिक ताकत के गढ़ के हिला के रख दिहलस।
कांग्रेस के खगेन्द्र अधिकारी के सिर्फ १ हजार ८ सय २१ मत मिलल, जवन साफ बतावता कि एह क्षेत्र में पुरान दलीय पकड़ टूट गइल बा आ लहर के राजनीति हावी हो गइल बा।
सबसे दिलचस्प बात ई बा कि जवन क्षेत्र से ओली दशकों से नेपाली राजनीति के दिशा देत आइल बाड़ें, ओही जगह जनता अब बालेन जइसन युवा आ वैकल्पिक सोच के नेता के खुले दिल से स्वीकार कइले बा। पहिलके कोशिश में अइसन मजबूत नेता के हराके बालेन के संसद पहुंचल राजनीतिक विश्लेषक लोग खातिर बहुत बड़ा उलटफेर मानल जा रहल बा।
ई जीत से संसद में युवा आवाज के प्रतिनिधित्व बढ़े वाला बा, साथे पुरान राजनीतिक ताकत के आत्मसमीक्षा करे के मजबूर भी कर दिहलस। झापा से उठल ई लहर आगे चलके देश के राजनीति आ नेतृत्व के रूप कैसान होई, ओकर साफ संकेत दे रहल बा।

