काठमांडू। ईरान आ अमेरिका–इजरायल के बीच जारी संघर्ष के कारण दुनिया के ऊर्जा बाजार में गंभीर संकट पैदा भइल बा।
कच्चा तेल के आपूर्ति खातिर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण मानल जाए वाला ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जलमार्ग के ईरान प्रभावी ढंग से बंद कर दिहले बा। एहसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इंधन के दाम एकदम से 40–50 प्रतिशत तक बढ़ गइल बा। युद्ध जब तिसरका हफ्ता में प्रवेश कइले बा, कच्चा तेल के कीमत सोमार के लगभग 100 डॉलर के आसपास पहुंच गइल बा। ई नाकाबंदी खाड़ी क्षेत्र से होखे वाला तेल आपूर्ति ठप्प कर दिहले बा, जेकर असर सीधे–सीधे दुनिया भर के उपभोक्ता के चुल्हाचाैका आ यातायात पर पड़ रहल बा।
बढ़त तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प रणनीतिक सक्रियता बढ़वले बाड़न। उ चीन समेत NATO के साझेदार देशन से जलमार्ग के फेरू चालू करे खातिर सैन्य मदद के अपील कइले बाड़न। ट्रम्प विशेष रूप से चीन, बेलायत, फ्रांस, जापान आ दक्षिण कोरिया से कहलन कि आपन तेल टैंकर के सुरक्षा खातिर युद्धपोत पठावस।
उ चीन के चेतावनी दिहले बाड़न कि अगर जलमार्ग खुलावे में सहयोग ना कइल गइल त चीनी राष्ट्रपति सी जिनपिङ से एह महीना होखे वाला शिखर सम्मेलन स्थगित हो सकेला। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया आ जापान जइसन देश अमेरिकी प्रस्ताव के अस्वीकार कर चुकल बा।
संघर्ष में सीधे शामिल ना होखे के कड़ा चेतावनी
दूसर ओर, ईरान कहले बा कि दोसरा देश सीधे ई युद्ध में शामिल ना होखे। इरानी विदेशमंत्री अब्बास अराघची कहले कि क्षेत्रीय सुरक्षा के नाम पर अमेरिकी सैन्य मौजूदगी समस्या के आउरी जटिल बनावत बा। युद्ध के असर ईरान, इजरायल, लेबनान आ खाड़ी के अन्य इलाका तक फैल गइल बा। ईरान रिवोलुसनरी गार्ड्स दावा कइले बा कि अब तक अमेरिका आ इजरायल के लक्ष्य पर 700 मिसाइल आ 3,600 ड्रोन प्रहार कइल गइल बा। दुबई हवाई अड्डा नजदीक ड्रोन हमला से आग लागला पर उड़ान प्रभावित भइल आ सऊदी अरब 60 से अधिक ड्रोन नष्ट कइले बा।
40 करोड़ बैरल तेल बाजार में पठावल जाई
ई चरम इंधन संकट कम करे खातिर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी अपना सदस्य देशन के रणनीतिक भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में भेजे के फैसला कइले बा। तेल पर 95 प्रतिशत निर्भर जापान अपना भंडार जल्दी खतम होखे के कारण संकटकालीन सूचना जारी कइले बा।
भारत में आयात अवरुद्ध होखे से रेस्टोरेंट लोग ग्यास बचावे खातिर मेन्यू बदलत बा, जबकि ऑस्ट्रेलिया में आम लोग से ‘पैनिक बाइंग’ ना करे के अपील कइल गइल बा। ईरान के भीतर 32 लाख लोग विस्थापित भइल बा आ संचार सेवा इन्ट्रानेट तक सीमित कइल गइल बा।

