म्याग्दी क्षेत्र नं. १ से प्रतिनिधि सभा सदस्य बनल महावीर पुन सांसद बनला के बाद पहिलका बेर वीरगंज आके आपन आत्मकथा किताब बेचले बाड़न।
एतवार के साँझिया वीरगंज पहुँचल पुन, जे राष्ट्रीय आविष्कार केन्द्र के अध्यक्षो हउवन, सोमार के भोर में घण्टाघर चोक पर किताब बेचत नजर अइले। ऊ बतवले कि सबेरे ८ से ११ बजे तक करीब १५० गो किताब बिक गइल।
ऊ कहलन कि मंगर तक ऊ वीरगंज कृषि औजार कारखाना में रहीहें, एहसे जेकरो किताब लेवे के इच्छा होखे, ऊ उहवें जा के संपर्क कर सकेला। मंगर साँझिया ऊ काठमांडू रवाना हो जइहें।
पुन कहलन कि चुनाव के बाद मिलल फुर्सत के समय के उपयोग करत ऊ अलग-अलग जिला में घूम के किताब बेचत बाड़न। ऊ कहले, पहिले किताब बेचत रहनी त बीच में मंत्री बन गइनी, फेर चुनाव आ गइल, एहसे किताब बेचना रुक गइल रहे। अब फुर्सत मिलल बा त फेर से किताब बेचत बानी।
ऊ साफ कहलन कि संसद बैठक चले पर ऊ सांसद के काम करिहें, आ जब बैठक ना रही त किताब बेचत रहिहें। ऊ कहले, “किताब बेच के जे पैसा आई, ओकरा से वीरगंज कृषि कारखाना के बहुत बड़ा आ बेहतर बनावे के बा।”
पिछला सालो किताब बेचत समय ऊ वीरगंज अइले रहले आ ९ दिन में करीब २ हजार किताब बेचले रहले। ऊ जानकारी दिहलन कि ५२६ दिन लगातार किताब बेच के करीब २ लाख ५० हजार किताब बेचले आ खर्च काट के १२ करोड़ से जादे आमदनी भइल, जेकरा से कारखाना चलावल जा रहल बा।
करीब दुई दशक से बंद रहल ई कारखाना, जे पहिले सरकार चलावत रहे, अब राष्ट्रीय आविष्कार केन्द्र के जिम्मा में आके फेर से चालू भइल बा। एह कारखाना के २०२१ साल (वि.सं.) में सोभियत संघ के सहयोग से स्थापित कइल गइल रहे, लेकिन घाटा के कारण २०५९ में बंद हो गइल रहे।
अब आविष्कार केन्द्र पुरान मशीन आ उपकरण के मर्मत करके करीब ५ दर्जन किसिम के कृषि औजार बना के बाजार में बेच रहल बा।

