वीरगंज – श्रद्धा, भक्ति आ तराई–मधेस के साझा सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मनावल जाए वाला चैती छठ पर्व के मुख्य दिन आजु मंगर के साँझ व्रतालु लोग डुबत सूरज आ छठी माता के अर्घ दे रहल बाडें।
चैत्र शुक्ल पक्ष के षष्ठी तिथि पर मनावल जाए वाला ई पर्व के ‘सँझिया घाटे’ कहल जाला। व्रतालु लोग नदी, पोखरा, तालाब आ अलग-अलग जलाशय में बनावल छठ घाट पर जाके सूरुज भगवान आ छठी माता के अर्घ देत बाडें।
वीरगंज के घड़ीअर्वा पोखरा, रानीघाट के सिर्सिया नदी, नगवा, छपकैया आ म्रुली जइसन प्रमुख छठ घाट पर आजु साँझिया व्रतालु लोग के भारी भीड़ रहे वाला बा।
अर्घ खातिर गहुँ या चाउर के पीठा से ठेकुवा, मुरई, गाजरा, हरदी के हरियर झार, निमो, नरियल, सम्तोला, केरा, सेव, पानी, सिँगडा, उख आ अन्य फल–फूल आ प्रसाद तैयार कइल गइल बा।
छठ पर्व के अंतिम दिन, बुधके सबेरे, व्रतालु लोग छठ घाट पर जाके उगत सूरुज के अर्घ दिहला के बाद पूजा विधिवत् रूप से समापन होई।
चैती छठ पर्व ‘नहाय खाय’ विधि से सुरु भइल रहे। सोमार के ‘खरना’ विधि सम्पन्न भइला के बाद मंगर से व्रतालु लोग निराहार व्रत जारी रखले बाडें।
सत्य, अहिंसा आ सभे प्राणी के प्रति सहानुभूति के संदेश देवे वाला ई महान् चाड तराई–मधेस में साल में दू बेर, कात्तिक आ चैत्र में मनावल जाला। पछिला कुछ साल में चैती छठ मनावे वाला लोग के संख्या लगातार बढ़त गइल बा।

